गरीब बर छिटका कुरिया नई हे,
अमीर बर महल अटारी।
इहि ल गरीबी कहिथे,
देखव जी संगवारी।
सरकार के विकाश ह ,
जाने कहा धस गे।
गरीब मनखे लाईका धरके,
पुलिया तरी बसगे,
सरकारी आवास ह कोठा बनगे,
गरीब के नइये चिन्हारी।
इहि ल गरीबी कहिथे,
देखव जी संगवारी।।
युवराज वर्मा "
बरगड़िया " साजा बेमेतरा
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