गुरुवार, 9 अगस्त 2018

तोर सुरता के डोरी मा,
अइसे बंधा गे हँव वो।
जइसे जेल मा कइदी,
होके धंधा गे हँव वो।।
अब नींद गवाँ गे,
सुन ले रे मोर मैना।
देखे बर तरसत हे,
ये दीवाना के दोनों नैना।
खटिया मा अल्थी कल्थी,
रात ला पहावत हँव।
कब अबे कइके जोड़ी,
सोर संदेस लमावत हँव

युवराज वर्मा "बरगड़िया"
साजा बेमेतरा

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भाई बहन का प्यार है राखी। खुशियोँ का बहार है राखी। हम सब के लिए, प्यार भरा त्यौहार है राखी। अटूट बंधन के धागों से, बंधता ये संसार है...