कविता गीत
शनिवार, 25 अगस्त 2018
मंगलवार, 14 अगस्त 2018
याद करलव ओला,
जेन भुइँया बर कुर्बान होगे।
लपेट के तिरंगा बदन मा,
माटी बर बलिदान होगे।।
बीर सपूत सहासी जनमे,
मोर भारत के कोरा मा।
देस के रक्षा खातिर,
छोड़ दिस दाई कोरा ला।।
भारत माता के सहासी बेटा,
मयँ तोला प्रणाम करँव।
जय हिंद जय भारत,
तोला सलाम करँव।।
💐💐💐💐💐
युवराज वर्मा "बरगड़िया"
साजा बेमेतरा
१४/०८/२०१८
जेन भुइँया बर कुर्बान होगे।
लपेट के तिरंगा बदन मा,
माटी बर बलिदान होगे।।
बीर सपूत सहासी जनमे,
मोर भारत के कोरा मा।
देस के रक्षा खातिर,
छोड़ दिस दाई कोरा ला।।
भारत माता के सहासी बेटा,
मयँ तोला प्रणाम करँव।
जय हिंद जय भारत,
तोला सलाम करँव।।
💐💐💐💐💐
युवराज वर्मा "बरगड़िया"
साजा बेमेतरा
१४/०८/२०१८
गुरुवार, 28 जून 2018
कोनो तो समझ ,
का चीज ये पानी ।
जिए के एक ठन चीज,
किथे ओला पानी।
गांव गली सड़क नाला,
झन बोहावव पानी ल।
जिए पिए के काम आहि,
ओ दीन मांगहू पानी ल।
पानी बिना हे बन ह सुन्ना,
चिरई चिरगुन उन्ना जी।
पानी बचाबोन नई बोहावन,
छोड़बो करनी जुन्ना जी।
एक दिन अईसे आही जी,
सबो परानी पछताबो ।
पानी बचबो पेड़ लगाबो,
तभे जिनगी ल पबो जी।
युवराज वर्मा बरगड़ा(साजा)
9131340315
का चीज ये पानी ।
जिए के एक ठन चीज,
किथे ओला पानी।
गांव गली सड़क नाला,
झन बोहावव पानी ल।
जिए पिए के काम आहि,
ओ दीन मांगहू पानी ल।
पानी बिना हे बन ह सुन्ना,
चिरई चिरगुन उन्ना जी।
पानी बचाबोन नई बोहावन,
छोड़बो करनी जुन्ना जी।
एक दिन अईसे आही जी,
सबो परानी पछताबो ।
पानी बचबो पेड़ लगाबो,
तभे जिनगी ल पबो जी।
युवराज वर्मा बरगड़ा(साजा)
9131340315
बरगड़िया आँव
मोर छत्तीसगढ़ के माटी,
जिहाँ के रहइया आँव।
बासी अउ चटनी खवइया,
निमगा छत्तीसगढ़िया ताँव।
युवराज वर्मा नाँव हे मोर,
बरगड़ा गाँव के आँव।
किसनहा के लईका मँय,
खेती किसानी कर थाँव।
खेत खार मोर करम धरम,
ये माटी के सेवा बजाँव।
छत्तीसगढ़ी बोली भाखा,
बोले बर तनिक नई लजाँव।
दाई ददा के सेवा करे बर,
पाछु कभू नइ जाँव।
गाँव हे मोर अब्बड़ सुग्घर,
तरिया नरवा अमरइया छाँव।
मोर गाँव के बोली भाखा,
आरुग छत्तीसगढ़ी ताय।
गाँव मा हे मोर सीतला दाई,
सुग्घर दया मया बरसाय।
युवराज वर्मा "बरगड़िया
साजा बेमेतरा
4-5-2018
जिहाँ के रहइया आँव।
बासी अउ चटनी खवइया,
निमगा छत्तीसगढ़िया ताँव।
युवराज वर्मा नाँव हे मोर,
बरगड़ा गाँव के आँव।
किसनहा के लईका मँय,
खेती किसानी कर थाँव।
खेत खार मोर करम धरम,
ये माटी के सेवा बजाँव।
छत्तीसगढ़ी बोली भाखा,
बोले बर तनिक नई लजाँव।
दाई ददा के सेवा करे बर,
पाछु कभू नइ जाँव।
गाँव हे मोर अब्बड़ सुग्घर,
तरिया नरवा अमरइया छाँव।
मोर गाँव के बोली भाखा,
आरुग छत्तीसगढ़ी ताय।
गाँव मा हे मोर सीतला दाई,
सुग्घर दया मया बरसाय।
युवराज वर्मा "बरगड़िया
साजा बेमेतरा
4-5-2018
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भाई बहन का प्यार है राखी। खुशियोँ का बहार है राखी। हम सब के लिए, प्यार भरा त्यौहार है राखी। अटूट बंधन के धागों से, बंधता ये संसार है...


